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ग्रीनसेल मोबिलिटी ने उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के लिए 307 करोड़ रुपये की फाइनेंसिंग हासिल की: एक सतत भविष्य की ओर कदम

ग्रीनसेल मोबिलिटी ने उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के लिए 307 करोड़ रुपये की फाइनेंसिंग हासिल की: एक सतत भविष्य की ओर कदम


भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र के लिए एक रोमांचक विकास में, ग्रीनसेल मोबिलिटी ने उत्तर प्रदेश में 350 इलेक्ट्रिक बसों को तैनात करने के लिए समिटोमोंत्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (SMBC) से 307 करोड़ रुपये की फाइनेंसिंग हासिल की है। यह साझेदारी भारत के स्वच्छ और सतत परिवहन समाधानों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस परियोजना के तहत, अनुमान है कि इसके अनुबंध अवधि के दौरान लगभग 2.35 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो देश के हरित ऊर्जा और सततता लक्ष्यों के साथ मेल खाती है।


ग्रीनसेल मोबिलिटी ने उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के लिए 307 करोड़ रुपये की फाइनेंसिंग हासिल की: एक सतत भविष्य की ओर कदम


ग्रीन फाइनेंसिंग: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए एक गेम चेंजर

यह परियोजना, जो अपनी ग्रीन फाइनेंसिंग मॉडल के लिए ध्यान आकर्षित कर रही है, भारत के स्वच्छ, कम-कार्बन परिवहन विकल्पों को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। इस समझौते के तहत, समिटोमोंत्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों की खरीद, संचालन और रख-रखाव के लिए दीर्घकालिक परियोजना फाइनेंसिंग प्रदान की है। इस पहल के तहत, राज्य के आठ शहरों में 9 मीटर लंबी, पूर्ण रूप से निर्मित और एयर कंडीशंड इलेक्ट्रिक बसों को तैनात किया जाएगा, जो शहरी परिवहन को आधुनिकीकरण और कार्बन-मुक्त बनाने में मदद करेगा।


SMBC से मिली 307 करोड़ रुपये की फाइनेंसिंग सुविधा का उपयोग भारत सरकार की FAME II (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) योजना के तहत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को निधि देने के लिए किया जाएगा। यह योजना उत्तर प्रदेश सरकार के शहरी परिवहन निदेशालय द्वारा संचालित है, जो सुनिश्चित करती है कि परियोजना राज्य के हरित परिवहन नियमों और नीति दिशानिर्देशों का पालन करे।


ग्रीनसेल मोबिलिटी के प्रबंध निदेशक और CEO, देवेंद्र चावला, ने साझेदारी और इस परियोजना के भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के परिप्रेक्ष्य में योगदान पर अपनी खुशी व्यक्त की। "ग्रीन फाइनेंसिंग हमारे प्रयासों को एक नया आयाम देने के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिससे हम भारत के इलेक्ट्रिक परिवहन क्षेत्र को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं," चावला ने कहा।



परियोजना का प्रभाव: CO2 उत्सर्जन में कमी

इस परियोजना का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव है। 350 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आने की उम्मीद है, जो भारत के व्यापक सततता लक्ष्यों में योगदान करेगा। ग्रीनसेल मोबिलिटी के अनुसार, इन इलेक्ट्रिक बसों के तैनाती से अनुबंध की अवधि के दौरान लगभग 2.35 लाख टन CO2 उत्सर्जन में कमी आएगी। यह देश के पर्यावरणीय लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान है, खासकर शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता और कार्बन उत्सर्जन के बढ़ते चिंताओं को देखते हुए।


इलेक्ट्रिक बसों को सार्वजनिक परिवहन के कार्बन पदचिह्न को घटाने के लिए सबसे प्रभावी समाधानों में से एक माना जाता है। पारंपरिक डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों से बदलने से परिवहन क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की मात्रा को महत्वपूर्ण रूप से कम किया जा सकता है, जो जलवायु परिवर्तन में योगदान करते हैं। यह परियोजना अन्य राज्यों में समान पहलों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जिससे स्वच्छ परिवहन में और निवेश आकर्षित होगा।



जो इलेक्ट्रिक बसें उत्तर प्रदेश में तैनात की जाएंगी, वे ऊर्जा-कुशल, विश्वसनीय और शहरी परिवहन की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं। पूर्ण रूप से एयर कंडीशन्ड इन बसों से यात्री अनुभव को भी बेहतर किया जाएगा, जिससे यह एक आरामदायक और आकर्षक परिवहन विकल्प बनेगा।



स्वच्छ और सतत परिवहन का एक दृष्टिकोण

भारत का परिवहन क्षेत्र ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है, जो मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन आधारित वाहनों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण है। सरकार ने इस चुनौती को पहचाना है और जलवायु परिवर्तन से निपटने और वायु गुणवत्ता सुधारने की रणनीति के रूप में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। FAME II योजना, जो इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपनाने का समर्थन करती है, स्वच्छ ऊर्जा परिवहन समाधानों की दिशा में परिवर्तन को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण रही है।


उत्तर प्रदेश में 350 इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती देशभर के शहरी परिवहन को बदलने के लिए एक बड़े दृष्टिकोण का हिस्सा है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की दिशा में बदलाव केवल उत्सर्जन को कम करने के बारे में नहीं है; यह एक अधिक सतत, लागत-प्रभावी और ऊर्जा-कुशल परिवहन प्रणाली बनाने के बारे में है। विशेष रूप से इलेक्ट्रिक बसों में पारंपरिक डीजल-चालित बसों की तुलना में कई फायदे हैं, जैसे कम परिचालन लागत, कम शोर प्रदूषण और न्यूनतम रख-रखाव आवश्यकता।

इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन भारत के स्वच्छ ऊर्जा और सतत प्रौद्योगिकियों में एक वैश्विक नेता बनने के लक्ष्य के लिए आवश्यक हैं। जैसे-जैसे अधिक राज्य और शहर इलेक्ट्रिक बसों को अपनाएंगे, भारत एक मजबूत EV इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में सक्षम होगा, जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र में और नवाचार और निवेश का मार्ग प्रशस्त करेगा।



ग्रीन परियोजनाओं को बढ़ावा देने में वित्तीय संस्थानों की भूमिका

समिटोमोंत्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (SMBC) की इस परियोजना में भागीदारी ग्रीन पहलों को समर्थन देने में वित्तीय संस्थानों की भूमिका को उजागर करती है। ग्रीन फाइनेंसिंग की पेशकश करके, SMBC ने ग्रीनसेल मोबिलिटी को अपनी इलेक्ट्रिक बस परियोजना को बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान किए हैं। यह प्रकार की फाइनेंसिंग विभिन्न उद्योगों में सततता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बनता जा रहा है, विशेष रूप से परिवहन क्षेत्र में।


SMBC इंडिया के कंट्री हेड, हिरोयुकी मेसाकी, ने बैंक की स्वच्छ परिवहन समाधानों को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। "हमारी वित्तीय विशेषज्ञता और वैश्विक नेटवर्क का उपयोग करके, हम स्वच्छ परिवहन समाधानों की दिशा में संक्रमण को सहायता प्रदान करना चाहते हैं, जो एक अधिक सतत भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा," मेसाकी ने कहा। एक वैश्विक वित्तीय संस्थान और भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रदाता के बीच यह सहयोग यह दिखाता है कि कैसे अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियां पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान कर सकती हैं।



FAME II योजना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर इसका प्रभाव

भारत सरकार द्वारा शुरू की गई FAME II योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपनाने को प्रोत्साहित करना है। यह योजना इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पारिस्थितिकी तंत्र को वित्तीय समर्थन प्रदान करने का लक्ष्य रखती है, जिसमें वाहन निर्माता, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता और सार्वजनिक परिवहन प्रणाली शामिल हैं। यह योजना विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इलेक्ट्रिक बसों के अपनाने को तेज करने में अहम भूमिका निभाती है, जो स्वच्छ और सतत परिवहन समाधानों की ओर बढ़ रहे हैं।


FAME II योजना के तहत, इलेक्ट्रिक बसों को सब्सिडी मिलती है, जो कुल खरीद लागत को कम करती है। इससे राज्य सरकारों और निजी ऑपरेटरों के लिए इलेक्ट्रिक बसों को अधिक सस्ती बनाने में मदद मिलती है, जिससे वे पारंपरिक ईंधन-आधारित बसों से इलेक्ट्रिक बसों की ओर संक्रमण कर सकते हैं। इसके अलावा, यह योजना चार्जिंग स्टेशन और अन्य आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना को बढ़ावा देती है, ताकि इलेक्ट्रिक बसों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया जा सके।


ग्रीनसेल मोबिलिटी के लिए, FAME II योजना का समर्थन और SMBC से प्राप्त वित्तीय सहायता उसकी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र में महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के लिए एक मजबूत आधार है। उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े की तैनाती के साथ, ग्रीनसेल मोबिलिटी का उद्देश्य शहरी परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बसों को दीर्घकालिक समाधान के रूप में साबित करना है।


भविष्य का दृश्य: भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का भविष्य

जैसे-जैसे भारत जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और बढ़ती जनसंख्या की चुनौतियों से जूझ रहा है, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी देश में परिवहन के भविष्य को आकार देने में एक केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश में 350 इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती इस बात का एक उदाहरण है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं।

आने वाले वर्षों में, यह संभावना है कि भारत के अधिक शहर इस परियोजना का अनुसरण करेंगे और इलेक्ट्रिक बसों और अन्य ग्रीन परिवहन समाधानों को अपनाएंगे। इस परियोजना की सफलता न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि अन्य राज्यों में भी विस्तार के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगी। सही नीति समर्थन, प्रौद्योगिकी में नवाचार और निरंतर वित्तीय निवेश के साथ, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारत के सतत भविष्य का आधार बन सकती है।



मुख्य बिंदु:

  1. ग्रीनसेल मोबिलिटी की परियोजना: ग्रीनसेल मोबिलिटी ने समिटोमोंत्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन से 307 करोड़ रुपये की फाइनेंसिंग प्राप्त की, ताकि उत्तर प्रदेश में 350 इलेक्ट्रिक बसों को तैनात किया जा सके।

  2. पर्यावरणीय प्रभाव: परियोजना के दौरान 2.35 लाख टन CO2 उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।

  3. FAME II योजना: परियोजना को भारत की FAME II योजना से समर्थन प्राप्त है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सब्सिडी प्रदान करती है।

  4. वित्तीय नवाचार: ग्रीन फाइनेंसिंग मॉडल स्वच्छ ऊर्जा परिवहन समाधानों के अपनाने को तेज करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

  5. भविष्य का दृष्टिकोण: यह परियोजना भारत के अन्य राज्यों और शहरों में इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने के लिए एक आदर्श स्थापित करती है, जिससे स्वच्छ परिवहन में और निवेश बढ़ेगा।



यह पहल भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र के लिए सकारात्मक दिशा का प्रतीक है और देश के पर्यावरणीय सततता लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान करती है।

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